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There is nothing wrong with good accounting, except that it does not necessarily lead to good science.

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Aggressive accounting does not mean illegal accounting.

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Accounting does not make corporate earnings or balance sheets more volatile. Accounting just increases the transparency of volatility in earnings.

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Sunday, December 26, 2021

छूट अथवा कटौती क्या होता है ?-What is Exemption or Discount ?

छूट अथवा कटौती दो प्रकार की होती है:-
(1) व्यापारिक छूट (Trade Discount)
(2) नकद छूट (Cash Discount)

(1) व्यापारिक छूट (Trade Discount):- यह छूट थोक व्यापारी अथवा निर्माता द्वारा सूची मूल्य (List Price) पर एक निश्चित प्रतिशत के रूप में फुटकर व्यापारी को दी जाती है। यह छूट उस समय दी जाती है जब माल इकट्ठा अर्थात बड़ी मात्रा में खरीदा जाता है। यह छूट नकद एवं उधार दोनों ही प्रकार के लेनदेनों पर दी जाती है क्योंकि यह क्रय से सम्बन्धित है भुगतान से नहीं। व्यापारिक छूट की अलग से कोई प्रविष्टि नहीं बनाई जाती, क्योंकि इसे कैश मेमो या बेजक में से ही घटा दिया जाता है।
उदाहरण के लिए, एक व्यापारी ₹ 1,00,000 का माल 20% व्यापारिक छूट पर नकद में बेचता है तो इसके लिए निम्न प्रविष्टि की जाएगी-

     Cash A/c.                    Dr.         80,000
            To Sales A/c                                 80,000

जब व्यापारिक छूट के अंतर्गत बेचा गया माल वापिस आ जाता है तो विक्रय वापसी पर भी माल के सूची मूल्य में से व्यापारिक छूट घटाई जाती है।


(2) नकद छूट (Cash Discount):- निश्चित समय पर अथवा शीघ्र भुगतान प्राप्त करने के लिए व्यापारी कुल रकम में से कुछ छूट दे देते हैं। इसे नकद छूट कहते हैं। यह छूट तभी दी जाती है जब ग्राहक एक निश्चित समय मे भुगतान कर दे। ऐसी छूट ग्राहक को शीघ्र भुगतान करने के लिए प्रेरित करती है। क्योंकि यह छूट रुपये के भुगतान के समय दी जाती है अतः नकद छूट की प्रविष्टि भी भुगतान के साथ ही कि जाति है। छूट खाता एक नाममात्र खाता होता है अतः जब हम छूट देते हैं तो यह व्यय होती है और हम छूट खाते को डेबिट करते हैं और जब हमें छूट प्राप्त होती है तो यह आय होती है और तब हम छूट खाते को क्रेडिट करते हैं।


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संयुक्त या मिश्रित प्रविष्टियाँ क्या है ?- What is Compound Entries?

कई बार एक ही तिथि को दो या दो से अधिक ऐसे लेन-देन होते हैं जो प्रायः एक ही खाते से सम्बन्धित होते हैं। इनकी अलग-अलग प्रविष्टियां करने की बजाए एक ही प्रविष्टि कर दी जाती है। इसे मिश्रित प्रविष्टि कहा जाता है।

उदाहरण के लिए:-
31 मार्च को ₹50,000 वेतन के तथा ₹20,000 किराए के दिए, तो इसकी निम्न प्रविष्टि होगी-

31st March
               Salary A/c          Dr.        50,000
               Rent A/c             Dr.         20,000
                           To Cash A/c.                  70,000
                          (Expenses paid)

मिश्रित प्रविष्टियां निम्न दशाओं में बनाई जा सकती हैं:- 
1. जब एक खाता डेबिट तथा दो या दो से अधिक खाते क्रेडिट हों।
2. जब एक खाता क्रेडिट तथा दो या दो से अधिक खाते डेबिट हों।
3. जब दो या दो से अधिक खाते डेबिट तथा दो या दो से अधिक खाते क्रेडिट हों।


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एक साधारण रोजनामचा कैसे बनाया जाता है ?- How to make a simple journal?


एक रोजनामचा बनाने के लिए निम्नलिखत प्रविष्टियां की जाती हैं :-


2021

 

     ₹

अप्रैल  1 

 रोकड़ लगाकर व्यापार प्रारम्भ किया 

 50,000 

            2

 नकद माल खरीदा 

 20,000 

           4

 सुभाष से माल खरीदा 

12,000  

           6 

 नकद फर्नीचर खरीदा

 6,000

           7

 नकद माल बेचा

 13,000

          10

 सुभाष को नकद भुगतान किया 

 8,000

          12

 महेश से नकद प्राप्त हुए

 10,000

          16

 कमीशन प्राप्त किया

 1,500

          17

 रवि से नकद माल खरीदा

 5,000

          20

 मशीनरी नकद क्रय की

 8,000

          24

 निजी प्रयोग के लिए बैंक से पैसे निकाले

 10,000

          25

 किराया भुगतान किया 

 500

          28

 गोपाल को वेतन का भुगतान किया 

 8,000

          30

 मजदूरी दी

 500



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Saturday, December 25, 2021

रोजनामचा का विभाजन क्या है ?- What is the Sub-Division of the journal?

रोजनामचा को विभिन्न भागों में बांटे जाने को रोजनामचा का विभाजन (Sub-Division of Journal) कहा जाता है। 

रोजनामचा यदि एक ही वही में नहीं तैयार कर उसे विभिन्न वाहियों में तैयार किया जाए तो उसे  कहा जाता है। जिस व्यवसाय  में बहुत अधिक लेन-देन होता है उस व्यवसाय में Sub-Division को अपनाया जाता है। 

Sub-Division Of Journal के अंतर्गत निम्नलिखित वही तैयार किये  हैं :-

  • क्रय वही  (Purchase Book ):- उधार खरीदे गए वस्तुओं तथा सेवाओं को लिखने के लिए जो वही तैयार किया जाता है उसे क्रय वही (Purchase Book) कहा जाता है। 
  • विक्रय वही (Sales Book):- उधार बेचे गए वस्तुओं तथा सेवाओं को लिखने के लिए जो वही तैयार किया जाता है उसे विक्रय वही (Sales Book) कहा जाता है। 
  • क्रय वापसी वही (Purchase Return Book):- उधार खरीदे गए वस्तुओं में से जो वस्तुएं वापस कर दी जाती है उसे लिखने के लिए जो वही तैयार की जाती है क्रय वापसी वही (Purchase Return Book) कहते हैं। 
  • विक्रय वापसी वही (Sales Return Book):- उधार बेचे गए वस्तुओं में से जो वस्तुएं वापस आ जाती है उसे लिखने के लिए जो वही तैयार की जाती है उसे विक्रय वापसी वही (Sales Return Book) कहते हैं। 
  • रोकड़ वही (Cash Book):- नकदी लेन-देनों को लिखने के लिए जो वही तैयार की जाती है उसे रोकड़ वही (Cash Book) कहा जाता है। 
  • प्राप्य विपत्र वही (Bills Receivable Book):- ऋणियों से प्राप्त हुए विपत्र को लिखने के लिए जो वही तैयार की जाती है उसे प्राप्य विपत्र वही (Bills Receivable Book) कहते हैं। 
  • देय विपत्र वही (Bills Payable Books):- महाजनों को दिए विपत्र को  लिखने के लिए जो वही तैयार की जाती है उसे देय विपत्र वही (Bills Payable Books) कहते हैं। 
  • रोजनामचा प्रधान वही (Journal Proper Books):- ऐसा कोई लेन-देन जिसका सम्बन्ध प्रथम सात वही में से किसी से नहीं होता है, ऐसे लेन-देन को लिखने के लिए जो वही तैयार किया जाता है उसे रोजनामचा प्रधान वही (Journal Proper Book) कहा जाता है। 

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रोजनामचा के प्रारूप क्या हैं ?-What is the format of journal?

रोजनामचा दो शब्दों के संयोग से बना हुआ है। इसमे पहला शब्द रोज है तथा दूसरा शब्द नामचा है। रोज का मतलब प्रतिदिन होता है तथा नामचा का मतलब दर्ज करने अर्थात लिखने से होता है।

प्रत्येक दिन के लेन-दिनों को तिथी अनुसार लिखे जाने को रोजनामचा कहते हैं। व्यवसाय के घटनाक्रमों को तिथी अनुसार लिखा जाना रोजनामचा कहलाता है।

रोजनामचे के प्रारूप (Format Of Journal)


उपरोक्त प्रारूप में खानों पर नंबर केवल यह समझाने के लिए डाले गए हैं कि जर्नल  तैयार किया जाता है। वास्तव में इस प्रकार नंबर नहीं डाले जाते हैं। 

रोजनामचा या जर्नल के पांच खाने होते हैं-

तिथि (Date):- यह रोजनामचा का पहला कहना है। इस खाने में सबसे ऊपर वर्ष लिखते हैं, फिर नीचे सौदे की तारीख को लिखा जाता है। तारीख लिखते समय पहले महीना और फिर तिथी लिखते हैं।

विवरण (Particulars):- यह सबसे महत्वपूर्ण खाना है। इस खाने में प्रभावित खातों के नाम दो पंक्तियों में लिखे जाते हैं।
पहली पंक्ति में डेबिट (Dr.) होने वाले खाते का नाम लिखा जाता है और दूसरी पंक्ति में क्रेडिट (Cr.) होने वाले खाते का नाम लिखा जाता है।

खाता पृष्ठ संख्या (Ledger Folio):- जरनल का तीसरा खाना खाता पृष्ठ संख्या का होता है। यह खाना छोटा बनाया जाता है। शीर्षक संक्षेप में लिखा जाता है, जैसे- L.F. इस खाने में खाताबही के उस पृष्ठ की संख्या लिखी जाती है जिस पर यह खाता ख़ातियाया गया है।

राशि (Amount):- राशि के दो खाने होते हैं। पहले खाने में डेबिट खाते वाली राशि और दूसरे खाने में क्रेडिट खाते वाली राशि लिखी जाती है। डेबिट किये जाने वाले खातों की राशि डेबिट वाली प्रविष्टि के सामने लिखी जाती है और क्रेडिट किये जाने वाले खातों की राशि क्रेडिट वाली प्रविष्टि के सामने लिखी जाती है।


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Wednesday, December 15, 2021

अवास्तविक खातों के लिए रोजनामचा में लेखा करने के नियम क्या हैं ? - What is the rules of Journilising For Nominal Account ?

अवास्तविक खातों के  लिए रोजनामचा में लेखा करने के नियम इस प्रकार हैं (Rules Of Journilising For Nominal  Account)


समस्त समस्त व्यय तथा हानियों को डेबिट करें (Debit All Expenses And Losses)


समस्त आय तथा लाभों को क्रेडिट करें (Credit All Income And Gains)


उदाहरण के लिए :-

वेतन का भुगतान किया। वेतन अवास्तविक खता है। यहां वेतन व्यय है। वेतन का भुगतान नकद किया जाता है। रोकड़ वास्तविक खाता है और वह जाने वाली वास्तु है इसलिए वेतन को डेबिट तथा रोकड़ को क्रेडिट किया जाता है। 


ब्याज प्राप्त किया। ब्याज अवास्तविक खाता है और यह आय है इसलिए व्याज को क्रेडिट किया जाएगा और नकद या रोकड़ खाते को डेबिट किया जायेगा क्योंकि रोकड़ वास्तविक खाता है। 


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वास्तविक खातों के लिए रोजनामचा में लेखा करने के नियम क्या हैं ? - What is the rules of Journilising For Real Account ?

वास्तविक खातों के  लिए रोजनामचा में लेखा करने के नियम इस प्रकार हैं (Rules Of Journilising For Real Account)

प्राप्त  होने वाली वास्तु / संपत्ति के खाते को डेबिट किया जाता है (Debit What Comes In)

दी जाने वाली वास्तु / संपत्ति के खाते को क्रेडिट किया जाता है (Credit What Goes Out)

उदाहरण के लिए :-

जब सौदे का एक रूप वास्तविक तथा दूसरा रूप व्यक्तिगत खाता हो तो 

विशाल से मोबाइल खरीदा।  इस लेन-देन में  मोबाइल को डेबिट किया जायेगा क्योंकि मोबाइल हमारे पास आता है। 

विशाल के खाते को जमा करेंगे। 


जब सौदे के दोनों पक्ष वास्तविक खाता हों

नकद माल खरीदा। इस लेन-देन के दो पक्ष हैं- नकद यानी रोकड़ माल। 

माल आने वाली वास्तु है इसलिए माल को डेबिट किया जायेगा। रोकड़ जाने वाली वास्तु है इसलिए रोकड़ को क्रेडिट करेंगे। 


जब सौदे का एक पक्ष वास्तविक तथा दूसरा पक्ष अवास्तविक हो 

वेतन का भुगतान किया गया। वेतन अवास्तविक खाता है और रोकड़ वास्तविक खाता है। रोकड़ जाने वाली वस्तु है, इसलिए इसे क्रेडिट करेंगे और वेतन खर्च है  इसलिए इसे क्रेडिट करेंगे। 


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